Abstract
अध्यापक शिक्षा की गुणवत्ता व विकास : राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में
Author : डॉ ऊषा शर्मा
Abstract
शिक्षा पूर्ण मानव क्षमता को प्राप्त करने, राष्ट्रीय विकास को बढ़ावा देने के लिए तथा न्यायपूर्ण समाज के विकास के लिए बहुत आवश्यक है । ज्ञान के परिदृश्य में पूरा विश्व तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है । अतः भारतवर्ष में भी विद्यालयी शिक्षा, उच्चतर शिक्षा तथा अध्यापक शिक्षा में भी तेजी से परिवर्तन आ रहा है । 21वीं सदी की आवश्यकताओं को देखते हुए गुणवत्तापूर्ण उच्चतर शिक्षा जरूरी हो गई है, कुशल, योग्य तथा बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्तित्व की आवश्यकता महसूस की जा रही है । ऐसे शिक्षकों की वर्तमान में आवश्यकता है जो कि भविष्य का कुशलतापूर्वक निर्माण कर सकें । अतः अगली पीढ़ी को आकार देने वाले शिक्षकों की एक टीम का निर्माण करने में अध्यापक शिक्षा की भूमिका महत्वपूर्ण है । अध्यापक शिक्षा के लिए बहु -विषयक इनपुट के साथ-साथ उच्चतर गुणवत्ता युक्त विषयवस्तु और शैक्षणिक प्रक्रियाएँ भी आवश्यक है । शिक्षण पेशे की प्रतिष्ठा को बहाल करने के लिए आवश्यक नैतिकता और विश्वसनीयता के स्तरों में सुधार करना आवश्यक है अगर विद्यालयी शिक्षा में सुधार चाहिए तो अध्यापक शिक्षा में सुधार लाना परमावश्यक है । यह सुनिश्चित किया जाना भी जरूरी है कि अध्यापक शिक्षा और शिक्षक प्रक्रियाओं से संबंधित अद्यतन प्रगति के साथ - साथ भारतीय मूल्यों, भाषाओं, ज्ञान, लोकाचार, परंपराओं, जनजातीय परंपरा और संस्कृति के प्रति भी जागरूकता उत्पन्न हो सकें ऐसी शिक्षा हो और ऐसी सोच वाले शिक्षक तैयार किया जाए, क्योंकि अगर यह कहा जाए कि शिक्षक जन्मजात होते हैं तो ऐसा नहीं है शिक्षक जन्मजात नहीं होते अपितु उनको कुशल प्रशिक्षक द्वारा तैयार किया जाता है । भारत सरकार द्वारा भी अच्छे शिक्षकों की एक श्रृंखला तैयार करने के लिए समय-समय पर कई प्रयास किए गए हैं, इसी के तहत वर्तमान समय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 द्वारा कई सराहनीय कदम उठाए गये हैं ताकि भारत की उन्नति में अच्छे अध्यापकों द्वारा सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सकें । जिसके लिए प्रशिक्षण प्रक्रिया में लचीलापन, नवाचार तथा बहुविषयक और मातृभाषा माध्यम जैसे सुधारों को 2035 तक अपनाने का प्रयास किया जा रहा है ।
